बज्जिका हम्मर माई के भाषा है । जइसे अप्पन माई के बिसर जनाई अथवा भुला देनाई ओक्कर प्रति कृतघ्नता होइय, ओसही अप्पन मातृभाषा के भुला के हम अप्पन जड़ से कट जाइछी । कर्ण के चरित्र पर तऽ हिन्दी आ अन्य भाषा में कै गो महाकाव्य, प्रबंधकाव्य, उपन्यास आदि लिख्खल गेल हन । हम्मर उनका चरित्र पर बज्जिका में लिखे के मकसद ई रहल हन कि बज्जिका में छंद के कइसे जुबान पर बइठायल जाय आ अप्पन सोच के कर्ण के पाठक के सामने लाएल जाय ।
(हरिनारायण सिंह 'हरि)
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